हमारा रहवास

हमें कैसे स्थान को अपना घर बनाना चाहिए इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने 5 बातें बताई हैं। जिस भी स्थान पर ये बातें उपलब्ध हों, वहां रहना सर्वश्रेष्ठ है और वहां रहने वाला व्यक्ति हमेशा प्रसन्न और सुखी रहता है।

आचार्य चाणक्य कहते हैं-

धनिक: श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पंचम:।

पंच यत्र न विद्यन्ते तत्र दिवसं वसेत्।।

इस संस्कृत श्लोक का अर्थ है कि जिस स्थान पर कोई धनी हो वहां व्यवसाय में बढ़ोतरी होती है। धनी व्यक्ति के आसपास रहने वाले लोगों को भी रोजगार प्राप्त होने की संभावनाएं रहती है। जिस स्थान पर कोई ज्ञानी, वेद जानने वाला व्यक्ति हो वहां रहने से धर्म लाभ प्राप्त होता है। हमारा ध्यान पाप की ओर नहीं बढ़ता है। जहां राजा या शासकीय व्यवस्था से संबंधित व्यक्ति रहता है वहां रहने से हमें सभी शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त होता है। जिस स्थान पर नदी बहती हो, जहां पानी प्रचुर मात्रा में हो, वहां रहने से हमें सभी प्राकृतिक वस्तुएं और लाभ प्राप्त होते हैं। अंत में पांचवी बात है वैद्य का होना। जिस स्थान पर वैद्य हो वहां रहने से हमें बीमारियों से तुरंत मुक्ति मिल जाती है।

अत: आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई ये पांच जहां हो वहां रहना ही लाभकारी रहता है।

सौजन्य : भास्कर

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