संपर्क (भागवत)

संपर्क की वृत्ति को बनाए रखिएगा। संपर्क में दूसरी बात समय दीजिए बड़े-बूढ़ों को, बच्चों को। उस समय कोई चर्चा नहीं होगी, बस आपस में क्या चल रहा है, पूछिए स्वास्थ्य कैसा है, कैसा लगता है।

बूढ़े लोगों को उनकी पुरानी बातें करो तो उनको अच्छा लगता है। हम भी बूढ़े होंगे तब लोग आपसे पूछेंगे आपके समय में आप कैसा करते थे फिर आप उनको बताएंगे तो वो बहुत प्रसन्न होंगे। बुढ़ापे में उनको कुछ ऊर्जा प्रदान करिए, उनकी स्मृतियों को ताजा करिए।बूढ़े लोगों के पास क्यों नहीं बैठते लोग, एक तो बच्चों को यह रहता है कि दादा-दादी एक ही किस्सा 25 बार सुना चुके हैं और अब बैठाकर वही किस्सा सुनाएंगे। तो देखते ही भागते हैं लोग इधर-उधर, नहीं ऐसा मत करिए, समय दीजिए। आप अपने संपर्क से घर की वृद्धावस्था, बड़े लोगों को सुख प्रदान करें। घर में वृद्ध लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट हो इसका प्रयास करिएगा।आपने एक घटना सुनी होगी। एक घर में दादा-दादी बैठे हुए थे, पास में बच्चे बैठे हुए थे। बच्चे दादा-दादी से छिछोरापन कर रहे थे। बच्चों ने दादा-दादी से पूछा आप बताओ आपके समय और हमारे समय में कितना परिवर्तन आया। उन्होंने कहा- हां, बहुत बदल गया है वक्त, हम देख रहे हैं। बच्चे बोले- दादाजी आपकी दादीजी से शादी हुई तो आपने दादीजी को पहली बार कब देखा था। वे बोले भैया बहुत दिन तो पता नहीं लगा, वो काल ही अलग था। दादा बोलते हैं पहले बड़ी मुश्किल होती थी। दादा से बच्चों ने पूछा आप घर में रहते और आपको दादी को देखने की इच्छा होती तो आप क्या करते थे? दादा ने कहा भैया कुछ न कुछ तो करना ही पड़ता था। बच्चों ने बोला दादाजी आप क्या करते थे, बताओ तो सही। दादाजी बोले हमने एक घंटी रखी हुई थी। बाहर बैठते तो घंटी बजाते, दादी आ जाती और हम उसको देख लेते। पोतों ने बोला दादाजी आप तो बड़े स्मार्ट थे।

दादाजी आप तो पुरूष थे, पुरूषप्रधान युग था तो आपने घंटी रख ली और घंटी बजा ली तो दादी आई और आपने देख लिया पर जब कभी दादीजी को आपको देखने की इच्छा हो तो दादी क्या करती होंगी। दादाजी बोले- वह थोड़ी-थोड़ी देर में आकर पूछती घंटी तो नहीं बजाई।आनंद अगर आप मनाना चाहें तो बुढ़ापे में भी मना सकते हैं। वो लोग परमात्मा की पूजा कर रहे हैं जो लोग अपने घर के बड़े-बूढ़ों को हंसा रहे हैं। हंसाइए, हम इनके अंश हैं इन्होंने रातें जाग-जागकर जीवन दिया है हमको। कल हम भी उस स्थिति में आएंगे। आज जो आप करेंगे वो कल पलटकर आपके ऊपर आ जाएगा। इसलिए घर के बड़ों को स्नेह दीजिए। परिवार में प्रेम बनाए रखिए। यह जीवन प्रबंधन का महत्वपूर्ण सूत्र है।

 सौजन्य : भास्कर (श्री विजय शंकर मेहता)

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